रायपुर नगर निगम की बजटीय स्थिति का अध्ययन

(1970-71 से 2001-02)

 

Dr. Mrs. Vandana Tiwari

Principal, Vidya Kunj HSS, Dhamtari CG

*Corresponding Author E-mail: vkslprincipal2016@gmail.com; vksldhamtari09@gmail.com

 

ABSTRACT

संध एक प्रकार की सरकार है, जिसमें सर्वोत्तम सत्ता अथवा राजनैतिक शक्ति का वितरण केन्द्रीय और स्थानीय सरकारों में इस प्रकार होता है, जिसमें कि प्रत्येक राज्य अपने क्षेत्र में कार्य करने के लिए स्वतंत्र है।     

 

प्रस्तावना:-

भारतीय संविधान के अनुसार भारत एक संध राज्य है। शासन व्यवस्था के द्वितीय स्वरुप अर्थात् संघात्मक शासन में किसी भी देश में दो या दो से अधिक सरकारे वि़़द्यमान होती है- केन्द्रीय, प्रान्तीय राज्यीय एवं स्थानीय। संघात्मक शासन में कुछ अपवादों को छोडकर सभी मामलों में इन सरकारों के कार्य व कार्यक्षेत्र परस्पर स्वतंत्र होते है।

 

 

संघीय शासन प्रणाली में केन्द्र तथा राज्य सरकारों के मध्य कार्यो का जो विभाजन होता है, वह विभिन्न देशो में भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। समान्यतः जो कार्य संपूर्ण देश के लिए महत्वपूर्ण होती है वह केन्द्र सरकार को तथा क्षेत्रीय कार्य राज्य सरकार को तथा स्थान विशेष के कार्य स्थानीय सत्ता नगर- निगमको सौंप दिये जाते है।

 

ऐसी शासन व्यवस्था जो स्थान विशेष में कार्यशील रहती है, उसे स्थानीय शासन कहते है।स्थानीय शासन व्यवस्था प्रजातंत्र का प्रमुख आधार हैं यह शासन व्यवस्था राजनैतिक चेतना को जागृत करने तथा प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था को सुचारु रुप से चलाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।स्थानीय संस्थाओं की व्यय का आकार व आय की तीव्रता भले ही कम हो किंतु उसके उत्तरदायित्व बहुत अधिक होते है।स्थानीय संस्थाओं का प्रमुख उद्देश्य अधिकतम समाजिक लाभ प्राप्त करना होता है।

अध्ययन का उद्देश्य एवं प्रविधि :-

प्रस्तुत शोध पत्र के अध्ययन का उद्देश्य स्थिर एवं प्रचालित मूल्यों पर 1970-71सं 2001-02 तक रायपुर नगर निगम के बजटीय स्थिति का अध्ययन करना है।

 

आॅकडों का संकलन:-

प्रस्तुत शोध पत्र द्वितीयक समंको पर आधारित कालश्रेणी समंको का संकलन मुख्य रुप से जिला सांख्यिकीय पुस्तिका तथा रायपुर नगर निगम द्वारा प्रकाशित विभिन्न पुस्तिकाओं से लिया गया है।

 

आॅकडों का विश्लेषणः-

रायपुर नगर निगम के बजटीय स्थिति का अध्ययन प्रचलित मूल्यों के साथ-साथ स्थिर मूल्यों पर किया गया है।

 

 

 

 

उक्त तालिका हमें रायपुर नगर निगम की बजटीय स्थिति घाटे की स्थिाति कों प्रदर्शित करता है। तालिका के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि वर्ष 1970-71 में कुल आय 62,40,881 रु. तथा कुल व्यय 55,83,667 रु. रहा, जिससे इस वर्ष नगर निगम को लगभग 6,57,214रु. के अरिरेक की प्राप्ति हुई। कुल आय व कुंल व्यय वर्ष 2001-02 में बढकर 52,49,34,788 रु. हो गई, इस प्रकार कुल व्यय भी बढकर 77,46,35,277रु. बढ गया जो कि आय कि तुलना में अधिक था।

 

 

 

रायपुर नगर निगम की बजटीय स्थिति के प्रचलित मूल्य पर प्रस्तुत बजट के अतिरेेक की स्थिती प्रदर्शित करता ग्राफ प्रस्तुत है।

 

रायपुर नगर निगम की बजटीय स्थिति का अध्ययन स्थिर मूल्यों पर किये जाने को हम सरल रुप में ग्राफ में प्रस्तुत कर सकते हैः-

 

 

रायपुर नगर निगम के बजटीय स्थिति स्थिर मूल्यों पर, मूल्यों के अध्ययन से स्पष्ट किया जा सकता है कि-

 

नगर निगम को स्थिर मूल्य पर कुल आय वर्ष 1970-71में62,40,881 रु. प्राप्त हुए तथा कुल व्यय 55,83,667 रु. थें, इस प्रकार इस वर्ष अतिरेक के रुप में 6,57,214 प्राप्त हूए। वर्ष 2001-02 में केल आय 4,56,46,502 रु. तथा कुल व्यय 6,73,59,589 रु.हुए , जिसके परिणामस्वरुप इस वर्ष भी नगर निगम कों घाटा हुआ था।

 

संदर्भ ग्रंथ सूची:-

1                  डक माॅरिस:- पब्लिक एक्पेंडिचर रिलेटिव  फाइनेंस एण्ड रिसोर्सेस अलेक्शन”(पब्लिक फाइनेंस, पी0एच0 4532 पेज नं0-1, 1985)

2                  पुरोहित एम.सी.:- ग्रोथ एण्ड कंपोजीशन आफ स्टेट्स टैक्स एर्नस नीडेड“(बिजनेस क्वाडेड,10 अक्टुबर 1980)

3                  धोष विश्वनाथ:- म्यूनिसपल बाॅडीज मोर टैक्स एर्नस नीडेड“(अर्थ विजन,वाॅलयूम 18 2जून 1980)

4                  दत्ता शिवानी:- पब्लिक एक्सपेंडिचर इन वेस्ट बंगाल“ (इकाॅनामिक अफेयर्स, अगस्त सितम्बर 1979)

 

 

Received on 16.05.2016       Modified on 21.05.2016

Accepted on 20.06.2016   © A&V Publications all right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 4(2): April - June, 2016; Page 56-60